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About Baraso Ji
मध्य प्रदेश प्रान्त के भिण्डनगर से लश्कर रोड से 20 कि.मी की दूरी पर स्थित है। अति प्राचीन अतिशय क्षेत्र बरासों जी में अति प्राचीन टीले पर स्थित देवों द्वारा बनाया गया जैन मंदिर विराजमान है। जिन श्रुति केवली के अनुसार श्री 1008 भगवान महावीर स्वामी का समोशरण विपुलाचल पर्वत (राजगृह) ही बरासों का क्षेत्र है जी में मिति आश्विनी क्वार कृष्ण दौज के दिन आया था। भगवान महावीर स्वामी का समोशरण एक बार नहीं यहाँ तीन बार आया था बताया जाता है कि जिसमें हजारों की संख्या में मुनिराज थे और तव यहाँ लगभग 700 परिवार जैन निवास करते थे । देवों ने स्मृति रूप एक रात में देवों पुनीत जिन मंदिर की रचना की थी यहाँ की मूलनायक जिन प्रतिमाओं पर कोई चिन्ह या प्रशस्ति नहीं है। सभी लगभग चतुर्थकालीन जिन प्रतिमाएं है। जो कि मनोहारी आकर्षण एवं अतिशयकारी है जिनके दर्शन मात्र से बिगडे काम बन जाते है। बरासों जी क्षेत्र सौन्दर्य से परिपूर्ण है। मंदिर जी के नीचे बहती हुई नदी, विश्व की सबसे बड़ी वेदी प्राचीनतम प्रतिमायें। ऐसा लगता है कि आगम की दृष्टिसे संसार का स्वर्ग यहीं पर बसा है। सबसे प्राचीन वाहुवली स्वामी जी एवक पत्थर में तीन बाहुबली स्वामी और लगभग 1500 साल प्राचीन प्रतिमाओं का अनूठा दर्शन मिलता है। बरासों जी मंदिर जी में चतुर्दर्शी को अपने आप मंदिरों में घण्टों की आवाज सुनाई देती है। चरण छतरी : इस क्षेत्र में देवोपुनीत जिन मंदिर के ठीक पीछे हैं। जहाँ पहले भट्टारक की तन्त्र पीठथी जिसे संकटमोचन छतरी बोलते है। इसका बहुत महत्व हैं, सुनते आ रहे है। कि इस चरण छतरी से दीपावली के दोज के दिन जलता हुआ दीपक रात को लगभग 12
बजे आता है जो मंदिर जी की परिक्रमा करके मंदिर के पीछे आले में विलुप्त हो जाता हैं यह दृश्य गाँव के लोगों ने देखकर उस चरण छतरी की पूजा करना प्रारम्भ कर दी चरण छतरी की भक्ति करने से सभी की मनोकामनाए आज भी पूर्ण हो जाती है। अदभुद शिला : जो एक टीले पर रखी है आज तक कोई भी व्यक्ति उस शिला को सिर
से ऊपर नहीं उठा पाया । एक बार उस शिला को वहा से नीचे गिरा दिया गया चमत्कार यह हुआ कि वह शिला पुन: उसी स्थान पर आ गई । अतिशय क्षेत्र बरासों जी में वह शिला भी चमत्कारी है।
